मै आज ये ब्लॉग इसलिए लिख रहा हू क्योंकि बाल दिवस आने वाला है.... और बाल दिवस पर फिर वही हर बार की तरह...........
क्या इनका भी है बाल दिवस?
क्या इन्हें नहीं है स्कूल जाने का अधिकार?
क्या इनके लिए नहीं बना है शिक्षा का अधिकार?
कुछ इसी तरह के सवाल उठते है मन में जब इस तरह छोटे छोटे बच्चे फेक्ट्रियों में , घरों में , दुकानों में, यहाँ तक की स्कूल में जहाँ इन्हें शिक्षा की गारंटी तक दी जाती है ,में काम करते हुए दिखाई दे जाते हैं ...
ऐसे ही एक बच्चे से मै मिला था, जब मै घूम रहा था अपने मोहल्ले मै मेने उस से पूछा क्या नाम है तेरा ? पड़ता भी है yaa काम ही करता है ...
उसने बतया पड़ना तो चाहता हू पर मेरे पापा नहीं है न इसलिए मुझे भी माँ के साथ मिलकर काम करना पड़ता है...
फिर मै उससे कुछ न पूछ सका......
आपका
हेम चन्द्र पांडे

what about working 'baal majdoor'
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