Sunday, 8 June 2014

पहाड़ उबल रहा है...

जहॉ था कभी हरा भरा जंगल,
वहा खड़े हैं आज कॉन्क्रीट के महल|
वो चिड़ियों का चहचहाना अब कहॉ सुनाई देता है,
अब तो चारों आेर कॉन्क्रीट ही कॉन्क्रीट  दिखाई देता है|
अब पहाड़ों में कोयल नहीं गाती है,
जे०सी०बी० की आवाज सुनाई देती है|
कहते हैं पहाड़ का विकास हो रहा है,
पर लगता है विनाश हो रहा है|
पहले कहॉ होते थे पहाड़ों में पंखे,
अब ए०सी० का आउटडोर गरम हवा फेंक रहा है|
जंगल जल रहा है, पहाड़ उबल रहा है|

Friday, 27 April 2012

रिश्वत और सुविधा शुल्क में अंतर

                                 भ्रस्टाचार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट में आपका हार्दिक स्वागत है.............


                                                                   पाठ १- भ्रस्टाचार की जर्नल टर्मिनोलोजी :- 

प्रश्न -  रिश्वत और सुविधा शुल्क में अंतर बताइए ?

  1.   रिस्वतोलोजी के हिसाब से देखे तो सुविधा शुल्क और रिश्वत में भारी अंतर है  जब कोई आम या खास  जनता आपनी मर्ज़ी से पैसे दे दे तो उसे सुविधा शुल्क कहते हैं लेकिन जब पैसे मागकर लेने  पड़े तो उसे रिश्वत की संज्ञा दी जाती है.
  2. रिश्वत लेने में रिस्क ज्यादा  है सुविधा शुल्क में कम क्योंकि ये मांगना नहीं पड़ता जनता जनार्दन अपना समझकर खुद दान के रूप में देती है.
  3. सुविधा शुल्क लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती है रिश्वत मांगने में बहुत हिचकिचाहट होती है.
  4. सुविधा शुल्क नैतिक तो नहीं है पर ये गैरकानूनी भी नहीं है क्योंकि जनता जनार्दन खुद आपकी कुर्सी को ये सुविधा शुल्क अर्पण करती है .
  5. हमारी पुरजोर कोशिश यही है की हम सुविधा शुल्क की दरों में वृधि करंगे क्योंकि जब से ये अन्ना नाम का प्राणी इस भारत महान की धरती पर अवतरित हुआ है रिश्वत मांगने में और अधिक हिचकिचाहट का अनुभव होने लगा है हर समय यही दर लगा रहता है की कही सामने वाली पार्टी अन्ना दल से तो नहीं है
  6. रिश्वत लेने में रिस्क होने के कारण किसी तीसरी पार्टी को बीच में सेटिंग करानी पड़ती है जिससे रिश्वत की रकम में भारी कटौती  सर्विस चार्ज के रूप में हो जाती है.
  7. रिश्वत को मिलबांट कर खाना पड़ता है 
  8. जबकि तुम सुविधाशुल्क खुद हज़म कर सकते हो .
  9. अगर रिश्वत की रकम ऊपर तक न पहुंचे तो आपकी नौकरी को खतरा भी हो सकता है 
  10. सुविधा शुल्क के केस में ऐसा नहीं होता वहां सब चलता है 

आम पाठकगण यदि आप हमारे भारत महान के किसी भी सरकारी महकमे से सम्बंधित है तो  कृपया संपर्क करें   हमारी वेबसाइट सदेव  आपके लिए खुली है हमें आपकी २४*७  सेवा करने में गर्व होगा
                                          धन्यवाद  

                                                           ----------समाप्त ----------



आपका 

हेम चन्द्र पाण्डेय 

Sunday, 13 November 2011

ये हैं बदलते भारत की तस्वीरें


आपने आप में बहुत कुछ कहती तस्वीरें.......................................
बदलते भारत की तस्वीरें
बाल श्रम रोको ये आपराध है 
बच्चों को वहां भेजो जहाँ उन्हें इस उम्र में होना चाहिए 





आपका 
हेम चन्द्र पांडे 

Monday, 7 November 2011

क्या इनका भी है बाल दिवस?

 मै आज ये ब्लॉग इसलिए लिख रहा हू क्योंकि बाल दिवस आने वाला है.... और बाल दिवस पर फिर वही  हर बार की तरह...........
क्या इनका भी है बाल दिवस? 
क्या इन्हें नहीं है स्कूल जाने का अधिकार?
क्या इनके लिए नहीं बना है शिक्षा का अधिकार?
 कुछ इसी तरह के सवाल  उठते है मन में जब इस तरह छोटे छोटे बच्चे फेक्ट्रियों में , घरों में , दुकानों में,  यहाँ तक की स्कूल में जहाँ इन्हें शिक्षा की गारंटी तक दी जाती है ,में काम करते हुए दिखाई दे  जाते हैं ...
ऐसे ही एक बच्चे से मै मिला था, जब  मै घूम रहा था अपने मोहल्ले  मै मेने उस से  पूछा  क्या नाम है तेरा ? पड़ता भी है yaa काम ही करता है ...
उसने बतया पड़ना तो चाहता हू पर मेरे पापा नहीं है न इसलिए मुझे भी माँ के साथ मिलकर काम करना पड़ता है...
फिर मै उससे कुछ न पूछ सका......


आपका
हेम चन्द्र पांडे 

Monday, 20 June 2011

तिहाड़ के प्रेमी

ये ब्लॉग में उन लोगो के सम्मान में लिख रहा हू जिनको हमारी परम आदरणीयसरकार ने तिहाड़ जेल भेज दिया:-




कलमाड़ी जैसे राजाओ के तिहाड़ जाने के बाद मैंने सोचा क्यों न में अपने इलाके के कलमाड़ी सरीखे राजों से उनके विचारों को जान लू


तो में सबसे पहले पप्पू भैया के पास पहुँच गया "पप्पू भैया आप तिहाड़ के बारे में क्या जानते हो" मैंने कहा ।


पप्पू भैया बोले " बेटा तू पगला गया है तुझे तिहाड़ से क्या लेना देना वहां तो बड़े बड़े कलमाड़ी राजा रहते है तू क्या करेगा तिहाड़ के बारे में जान कर चल जा अपना काम कर " में उनके पास से उठा और चला गया उनके ही स्टाफ वाले घिसु राम जी के पास....


"अंकल जी नमस्कार " मैंने कहा "सफल हो बेटा" मुझे लगा अब तो काम हो गया भैया मुझे तिहाड़ के बारे में पता चल ही जायेगा " कहो कैसे आना हुआ " घिसु लाल जी ने कहा ।
अंकल एक बात पूछनी थी अगर आपको ऐतराज न हो तो । उन्होंने कहा अपनी आंटी के आने से पहले पूछ लो फिर नहीं बता पाउँगा अंकल बात ये है की मुझे तिहाड़ जेल के ........................... बीच में टोकते हुए उन्होंने कहा उसे जेल मत कहो वहां राजा जैसे लोग रहते है वो जेल नहीं राजाओं का महल है वहां कलमाड़ी से लेकर राजा और कनिमोज़ी से लेकर बड़े बड़े नेता लोग रहते है इसलिए वो जेल जेल नहीं है समझे बेटा तुम अभी बच्चे हो तुम्हे इन सब चीज़ों से मतलब नहीं होना चाहिए अपनी पढाई से मतलब क्यों नहीं रखते पढो लिखो कुछ बन जाओ तब सोचो तिहाड़ के बारे में ।
अंकल का तिहाड़ प्रेम देख कर में चला गया रामौतार भैया के पास इनके पास जरूर कुछ न कुछ मिल जायेगा बताने को " भैया नमस्ते कैसे हो ? क्या आप मुझे कुछ बता सकते हो तिहाड़ जेल के बारे में इनका पास थी पुख्ता जानकारी बोले "भैया तिहाड़ जाता वही है जिनके करम आचे होते है में तो ये ही कह सकता हू की तुम भी तिहाड़ जाना चाहते हो तो खूब पढ़ लिख लो किसी आचे ओहदे पर पहुँच जाओ फिर तिहाड़ के बारे में सोच लेना सारी जिन्दगी चैन से कटेगी एक कूलर मिलेगा गर्मी भर लाइट रहेगी। और सबसे बड़ी बात की सारा काम वाही अंदर बैठे बैठे हो जायेगा बस वहां जाने में कुछ दिक्कत हो सकती है उसे झेल लो बस फिर सारा आराम ही आराम ससुरी बत्ती तो वहां २४ घंटे रहती ही रहती है बाकि तो तुम्हे वहां पहुँचने के बाद पता चल जायेगा वहां का ठाट ही अलग है एक तरफ कलमाड़ी ताऊ दूसरी तरफ राजा जी मौजा ही मौजा है" फिर तो बाकि तुम देख लेना वहां जाकर ठीक है भाई अभी मुझे देर हो रही है मुझे ऑफिस जाना है ।
रामौतार भैया ने ऐसे एक्सप्लेन किया दिल खुश हो गया कसम से अब तो में भी कुछ करना चाहता हू ताकि...




आपका


हेम चन्द्र पांडे


Friday, 13 May 2011

आरक्षण क्या है ?

ये ब्लॉग में उन लोगो के लिए लिख रहा हु जो आरक्षण के प्रबल समर्थक हैं ... हे आरक्षण के समर्थकोमें आप लोगो से पूछना चाहता हु कि आरक्षण क्या है ?
आपको जवाब देने के लिए ज्यादा दिमाग लगाने कि जरुरत नहीं है... बस ये देख लीजिये कि इसने क्या हाल कर दिया है देश का अभी कुछ दिन पहले ही उत्तराखंड सरकार ने इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद के लिए साक्षात्कार लिया था अब उसके रिजल्ट आने लगे है जरा उस रिजल्ट पर ध्यान दीजियेगा बस पता चल जायेगा कि आपके आरक्षण ने शिक्षा कि कैसी पोल खोल दी है उत्तराखंड में ....... उसमे साफ़ दिख रहा है आपके आरक्षण का हाल?
उसमे 3७% वाला अभ्यर्थी जो कि आरक्षण के दाएरे में आता है उसका तो चयन हो गया लेकिन वो जो ६०% लेकर आया उसका चयन नहीं हो पाया क्योकि वो आरक्षण के दाएरे में नहीं आता था क्या ३७% वाला ६० वाले से आछा पड़ा पायेगा में तो कहता हु किजिसे खुद पढने कि जरुरत है वो क्या पदायेगा
कहती है कि हर बच्चे को शिक्षा मुफ्त में मिलेगीक्या मुफ्त में वो दिया जायेगा जो खुद के कम का ना हो वाह जी वाह अगर शिक्षा का यही हाल रहा तो सरकारी स्कूलों का तो राम ही मालिक है ...
में ये इसलिए नहीं लिख रहा कि मुझे आरक्षण नहीं मिल रहा ये मेरा गुस्सा उन लोगो पर है जिन्होंने आरक्षण को वोट बैंक बना लिया है..........
आरे भैया अब तो भोली भली जनता को आरक्षण के नाम पर बेवकूफ मत बनाओ.... ये लोग अब समझदार होने लगे है जिस दिन जाग गए ना तुम्हारी पतलून कमर से ऐसे गिरा देंगे जैसे सर्कस में ........ की अभी भी समय है संभल जाओ कम से कम शिक्षा और चिकित्सा में तो आरक्षण मत दो क्यों तुम सरकारी स्कूलों का सत्यानाश मार रहे हो इससे बछो की शिक्षा पर क्या असर पढ़ेगा हम भी तो सरकारी स्कूल में पढ़ते है हम जैसे गरीब बछो का क्या होगा ????? थोडा सा सोचो


आपका
हेम चन्द्र पांडे