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पाठ १- भ्रस्टाचार की जर्नल टर्मिनोलोजी :-
प्रश्न - रिश्वत और सुविधा शुल्क में अंतर बताइए ?
- रिस्वतोलोजी के हिसाब से देखे तो सुविधा शुल्क और रिश्वत में भारी अंतर है जब कोई आम या खास जनता आपनी मर्ज़ी से पैसे दे दे तो उसे सुविधा शुल्क कहते हैं लेकिन जब पैसे मागकर लेने पड़े तो उसे रिश्वत की संज्ञा दी जाती है.
- रिश्वत लेने में रिस्क ज्यादा है सुविधा शुल्क में कम क्योंकि ये मांगना नहीं पड़ता जनता जनार्दन अपना समझकर खुद दान के रूप में देती है.
- सुविधा शुल्क लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती है रिश्वत मांगने में बहुत हिचकिचाहट होती है.
- सुविधा शुल्क नैतिक तो नहीं है पर ये गैरकानूनी भी नहीं है क्योंकि जनता जनार्दन खुद आपकी कुर्सी को ये सुविधा शुल्क अर्पण करती है .
- हमारी पुरजोर कोशिश यही है की हम सुविधा शुल्क की दरों में वृधि करंगे क्योंकि जब से ये अन्ना नाम का प्राणी इस भारत महान की धरती पर अवतरित हुआ है रिश्वत मांगने में और अधिक हिचकिचाहट का अनुभव होने लगा है हर समय यही दर लगा रहता है की कही सामने वाली पार्टी अन्ना दल से तो नहीं है
- रिश्वत लेने में रिस्क होने के कारण किसी तीसरी पार्टी को बीच में सेटिंग करानी पड़ती है जिससे रिश्वत की रकम में भारी कटौती सर्विस चार्ज के रूप में हो जाती है.
- रिश्वत को मिलबांट कर खाना पड़ता है
- जबकि तुम सुविधाशुल्क खुद हज़म कर सकते हो .
- अगर रिश्वत की रकम ऊपर तक न पहुंचे तो आपकी नौकरी को खतरा भी हो सकता है
- सुविधा शुल्क के केस में ऐसा नहीं होता वहां सब चलता है
धन्यवाद
----------समाप्त ----------
आपका
हेम चन्द्र पाण्डेय
comment on it.......
ReplyDeleteye risvat nahi ye to ghat ke devta ka chadava hai...
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